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विनोद कुमार उपाध्याय

हमारे आदर्श

अंतिम व्यक्ति की सेवा, राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक गौरव: जिन विचारों पर हम चलते हैं, वे इन्हीं जीवनों से आते हैं।

आज का विचार

दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा।
स्वामी दयानन्द सरस्वती (आर्य समाज)स्वामी दयानन्द सरस्वती (आर्य समाज)

हमारे आदर्श

सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना के जननायक

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल
    हमारे देश की मिट्टी में कुछ अनूठा है, तभी तो कठिन बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास स्थान रहा है।
    सरदार वल्लभ भाई पटेल (1875–1950)
  • मोरारजी देसाई
    किसी भी समय जीवन मुश्किल बन सकता है और किसी भी समय जीवन बहुत आसान बन सकता है। यह सब हमारे जीवन के समायोजन पर निर्भर करता है।
    मोरारजी देसाई (1896–1995)
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर
    समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना होगा।
    डॉ. भीमराव अम्बेडकर (1891–1956)
  • मदर टेरेसा
    हम सब यही सोचते हैं कि हमारे किए गए कार्य तो समुद्र में एक बूँद के बराबर होते हैं, लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि उस बूँद के बिना सागर का पानी तो कम ही होगा।
    मदर टेरेसा (1910–1997)
  • अब्दुल कलाम
    जीवन में सुख का अनुभव तभी प्राप्त होता है, जब इन सुखों को कठिनाइयों से प्राप्त किया जाता है।
    अब्दुल कलाम (1931–2015)
  • स्वामी विवेकानन्द
    किसी भी कार्य को करने के लिए तुरंत उठो, जागो और तब तक नहीं रुकना जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए।
    स्वामी विवेकानन्द (1863–1902)
  • राम कृष्ण परमहंस
    जब फूल खिलता है तो मधुमक्खी बिना बुलाए आ जाती है, और हम जब प्रसिद्ध होंगे तो लोग बिना बताए हमारा गुणगान करने लगेंगे।
    राम कृष्ण परमहंस (1836–1886)
  • रवीन्द्रनाथ टैगोर
    हम ये प्रार्थना ना करें कि हमारे ऊपर खतरे न आएँ, बल्कि ये करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहें।
    रवीन्द्रनाथ टैगोर (1861–1941)
  • सुभाष चन्द्र बोस
    हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो, हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो, फिर भी हमें आगे बढ़ना ही है। सफलता का दिन दूर हो सकता है, पर उसका आना अनिवार्य है।
    सुभाष चन्द्र बोस (1897–1945)
  • स्वामी दयानन्द सरस्वती (आर्य समाज)
    दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा।
    स्वामी दयानन्द सरस्वती (आर्य समाज) (1824–1883)
  • चन्द्रशेखर आज़ाद
    आप हर दिन दूसरों को अपने रिकॉर्ड तोड़ने की प्रतीक्षा मत करो, बल्कि खुद उसे तोड़ने का प्रयत्न करो, क्योंकि सफलता के लिए आपकी खुद से लड़ाई है।
    चन्द्रशेखर आज़ाद (1906–1931)
  • झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई
    चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

    सुभद्रा कुमारी चौहान

    झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (1828–1858)
  • महात्मा ज्योतिबा फुले
    विद्या बिन मति गयी, मति बिना नीति गयी, नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया।
    महात्मा ज्योतिबा फुले (1827–1890)
  • सावित्रीबाई फुले
    जाओ, जाकर पढ़ो-लिखो, बनो आत्मनिर्भर, बनो मेहनती, काम करो, ज्ञान और धन इकट्ठा करो। ज्ञान के बिना सब खो जाता है।
    सावित्रीबाई फुले (1831–1897)
  • भगत सिंह
    जो व्यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है, उसे हर एक रूढ़िवादी चीज़ की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी।
    भगत सिंह (1907–1931)
  • महात्मा गांधी
    हमें स्वच्छता और सफाई का मूल्य पता होना चाहिए… गंदगी को हमें अपने बीच से हटाना होगा… क्या स्वच्छता स्वयं इनाम नहीं है?
    महात्मा गांधी (1869–1948)